देहरादून में दिव्यांग प्रतिभाओं ने बिखेरा हुनर का रंग, हर्षल फाउंडेशन की ‘दिव्यांग टैलेंट प्रतियोगिता’ सफलतापूर्वक संपन्न

देहरादून। हर्षल फाउंडेशन द्वारा आयोजित दिव्यांग टैलेंट प्रतियोगिता का भव्य आयोजन आईआरडीटी ऑडिटोरियम, सर्वे चौक में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन में दिव्यांग बच्चों की अद्भुत प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से बच्चों ने भाग लिया, जिनमें उड़ान स्पेशल स्कूल, चेरी किड्स स्कूल, हिल ग्रुप स्कूल, ग्रीन फील्ड स्कूल, डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल डेवलपमेंट एंड इकोनॉमिक एंपावरमेंट, नेशनल करियर सर्विस सेंटर फॉर डिफरेंटली एबल्ड, रिफरल राइडर इंटरनेशनल सेंटर के साथ-साथ लगभग 15 बच्चों ने व्यक्तिगत रूप से भी भाग लिया। कुल मिलाकर डेढ़ सौ से अधिक दिव्यांग बच्चे उपस्थित रहे, जिनमें से 70 बच्चों ने गायन, नृत्य, काव्य पाठ, स्टैंड-अप कॉमेडी और अभिनय/नाटक जैसी विधाओं में शानदार प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “ऐसे आयोजन समाज में समावेशिता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देते हैं। दिव्यांग बच्चे किसी भी मायने में कम नहीं हैं, उन्हें केवल सही मंच और अवसर की आवश्यकता है। हर्षल फाउंडेशन द्वारा किया गया यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है और सरकार भी ऐसे प्रयासों को हर संभव सहयोग देगी।

संस्था के अध्यक्ष रमा गोयल ने कहा, “हमारा उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को एक ऐसा मंच देना है जहां वे अपने आत्मविश्वास को पहचान सकें और समाज के सामने अपनी प्रतिभा प्रस्तुत कर सकें। आज का यह आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और हम भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर करते रहेंगे।

इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट, अनिल गोयल, इंद्राणी पांडे, राज्य मंत्री विनोद उनियाल, पूर्व राज्य मंत्री अशोक वर्मा, राजकुमार पुरोहित, चंदन सिंह (मैथमेटिक्स विभाग), स्किल डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, राज्य मंत्री गीता राम गौड़, बलदेव भट्ट, ममता नगर, नेहा, राज्य मंत्री विनय रोहिल्ला, राज्य मंत्री विश्वास डावर, शोभित दास सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

विशेष रूप से संस्था से जुड़े ब्रिगेडियर के. जी बहल एवं जस्टिस राजेश टंडन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि सही मंच और प्रोत्साहन मिले तो दिव्यांग बच्चे भी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

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